बड़ी खबर: मसूरी में फर्जी UPSC चयन का भंडाफोड़, 2026 की रणनीति में साइबर और ड्रग्स पर पुलिस का फोकस

मसूरी में फर्जी UPSC चयन का भंडाफोड़, 2026 की रणनीति में साइबर और ड्रग्स पर पुलिस का फोकस

मसूरी/देहरादून। उत्तराखंड में एक ओर जहां युवाओं को निशाना बनाकर ऑनलाइन ठगी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य पुलिस ने 2026 के लिए सुरक्षा और प्रशासनिक मजबूती का विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है।

मसूरी में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में एक युवक फर्जी यूपीएससी रिजल्ट के आधार पर प्रशिक्षण लेने पहुंच गया।

अकादमी प्रशासन की सूचना पर मसूरी पुलिस, एलआईयू और इंटेलिजेंस ब्यूरो की टीमें मौके पर पहुंचीं। जांच में सामने आया कि युवक किसी आपराधिक मंशा से नहीं, बल्कि एक संगठित ऑनलाइन ठगी गिरोह का शिकार है।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि युवक से परीक्षा पास कराने के नाम पर ₹27,564 की ठगी की गई। नकद और यूपीआई के जरिए रकम लेने के बाद व्हाट्सएप पर उसे फर्जी यूपीएससी रिजल्ट भेजा गया।

पीड़ित फर्जी चयन को असली मानकर अपने माता-पिता और सामान के साथ मसूरी पहुंच गया। मामले में मसूरी कोतवाली में जीरो एफआईआर दर्ज कर केस को हरियाणा स्थानांतरित किया गया है।

इस घटना को युवाओं के लिए गंभीर चेतावनी बताते हुए पुलिस ने स्पष्ट किया कि यूपीएससी सहित किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का परिणाम केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही सत्यापित किया जाना चाहिए।

उधर, देहरादून में डीजीपी दीपम सेठ की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में उत्तराखंड पुलिस ने वर्ष 2026 का सुरक्षा रोडमैप तय किया। बैठक में आंतरिक सुरक्षा, साइबर अपराध, आतंकवाद विरोधी तैयारी और ड्रग-फ्री देवभूमि मिशन को शीर्ष प्राथमिकता दी गई।

एंटी टेरर कॉन्फ्रेंस-2025 के निर्देशों के अनुपालन में साइबर सर्विलांस और साइबर इंटेलिजेंस को और मजबूत करने, ATS और ANTF के पुनर्गठन, 1930 साइबर हेल्पलाइन को 112 से तकनीकी रूप से जोड़ने और पुलिस कल्याण, पदोन्नति व प्रशिक्षण को तेज करने पर जोर दिया गया।

डीजीपी ने ई-ऑफिस और ई-फाइल सिस्टम के माध्यम से समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया अपनाने, लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण और पुलिस बल के मनोबल को मजबूत करने के लिए उत्तराखंड पुलिस गीत को सभी आधिकारिक आयोजनों में अनिवार्य रूप से बजाने के निर्देश भी दिए।

ऑनलाइन ठगी की ताजा घटना और पुलिस की नई रणनीति यह साफ संकेत देती है कि उत्तराखंड में सुरक्षा से लेकर साइबर सतर्कता तक प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।