केदारनाथ से मुनस्यारी तक बर्फ की चादर, 2026 की पहली बर्फबारी से ऊंचे हिमालयी क्षेत्र सफेद

केदारनाथ से मुनस्यारी तक बर्फ की चादर, 2026 की पहली बर्फबारी से ऊंचे हिमालयी क्षेत्र सफेद

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में नए साल के साथ ही सर्दी ने अपना पूरा असर दिखाना शुरू कर दिया है। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में वर्ष 2026 की पहली बर्फबारी दर्ज की गई है, जबकि सीमांत पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी, धारचूला और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी लंबे अंतराल के बाद हिमपात हुआ है।

केदारनाथ धाम बर्फ की सफेद चादर में लिपटा

नए साल के दूसरे दिन शुक्रवार (2 जनवरी) को दोपहर बाद केदारनाथ धाम में लगातार बर्फबारी शुरू हुई, जो देर शाम तक जारी रही। बर्फबारी के चलते बाबा केदार की नगरी पूरी तरह सफेद चादर में ढक गई है।

केदारनाथ मंदिर परिसर और आसपास की पहाड़ियां स्वर्ग सरीखा दृश्य प्रस्तुत कर रही हैं। लगातार बर्फ गिरने के कारण धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्य प्रभावित हो गए हैं।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार के अनुसार, केदारनाथ धाम में करीब एक फीट तक बर्फ जम चुकी है, जिससे सभी प्रकार के निर्माण कार्य ठप पड़ गए हैं।

धाम में मौजूद मजदूरों को भी कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ रहा है और कुछ मजदूर नीचे की ओर लौटने लगे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, मार्च के अंतिम सप्ताह तक केदारपुरी में बर्फबारी का सिलसिला जारी रहने की संभावना रहती है। हालांकि, शीतकाल के लिए कपाट बंद होने के कारण धाम में कोई यात्री मौजूद नहीं है।

मुनस्यारी और पिथौरागढ़ की चोटियों पर लौटी रौनक

उधर, सीमांत पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भी लंबे इंतजार के बाद हल्की बर्फबारी हुई है। नंदा देवी, पंचाचूली, नंदाकोट, त्रिशूल, हरदेवल, राजरम्भा और छिपला केदार की चोटियों पर हिमपात दर्ज किया गया है। बर्फबारी के बाद मुनस्यारी समेत ऊंचाई वाले इलाकों में ठिठुरन बढ़ गई है।

पिछले वर्ष 2025 के अंतिम चार महीनों में बर्फबारी नहीं होने से हिमालय की चोटियां काली नजर आने लगी थीं और कई स्थानों पर बर्फ पूरी तरह पिघल गई थी, जिससे पर्यावरणविद चिंतित थे। अब ताजा हिमपात के बाद चोटियां फिर से चमक उठी हैं।

पर्यटन और खेती दोनों के लिए उम्मीद

मुनस्यारी के सामाजिक कार्यकर्ता हीरा सिंह चिराल ने बताया कि बर्फबारी से जहां प्राकृतिक सौंदर्य निखरा है, वहीं इससे पर्यटन बढ़ने की भी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस साल बारिश नहीं होने से खेती और बागवानी प्रभावित हुई है, ऐसे में अब लोग बारिश का भी इंतजार कर रहे हैं।

मौसम विभाग का अनुमान

मौसम वैज्ञानिक डॉ. चेतन भट्ट (केवीके पिथौरागढ़) के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक रूप से सक्रिय होने के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हल्का हिमपात हुआ है। आने वाले दिनों में जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में फिर से बर्फबारी के आसार बने हुए हैं।

निचले क्षेत्रों में जहां दिन में धूप खिली रही, वहीं ऊंची चोटियों पर हुई बर्फबारी के कारण शाम के समय शीत हवाओं से ठंड में इजाफा महसूस किया गया।