उत्तरकाशी से मनरेगा पर उठे सवाल, विधायक दंपती के खाते में रकम में गई मजदूरी। जांच के आदेश
उत्तरकाशी। सीमांत जिले उत्तरकाशी की पुरोला विधानसभा सीट से भाजपा विधायक दुर्गेश्वर लाल और उनकी पत्नी निशा के बैंक खातों में मनरेगा की मजदूरी की राशि जमा होने का मामला सामने आने के बाद प्रदेशभर में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सवाल यह उठ रहा है कि विधायक रहते हुए मनरेगा जैसी मजदूरी आधारित योजना की धनराशि उनके खातों में कैसे पहुंची।
जॉब कार्ड बना था पहले, विधायक बनने के बाद भी भुगतान
जानकारी के अनुसार, विधायक दुर्गेश्वर लाल का वर्ष 2022 से पहले मनरेगा जॉब कार्ड बना हुआ था। इसी जॉब कार्ड के आधार पर पूर्व में उन्हें और उनकी पत्नी को मनरेगा के तहत भुगतान होता रहा।
लेकिन अब विधायक बनने के बाद भी उनके और उनकी पत्नी के खातों में मनरेगा की मजदूरी जमा होने का मामला सामने आया है।
मनरेगा के ऑनलाइन पोर्टल के मुताबिक
- जून 2022 में विधायक की पत्नी निशा को रेक्चा में आम रास्ते के पीसीसी खड़ंजा निर्माण कार्य में मजदूरी दिखाई गई है।
- अगस्त–सितंबर 2024 में बाजुडी तोक में पीसीसी कार्य,
नवंबर 2024 में समलाडी तोक में वृक्षारोपण कार्य में मजदूरी भुगतान दर्शाया गया है। - वहीं वर्तमान वर्ष 2025 में स्वयं विधायक दुर्गेश्वर लाल को पिनेक्ची तोक में भूमि विकास कार्य में रोजगार दिया जाना पोर्टल पर दर्ज है।
22,962 रुपये का भुगतान दिखाया गया
पोर्टल के अनुसार—
- विधायक रहते हुए तीन कार्यों में 5,214 रुपये का भुगतान दिखाया गया है।
- वर्ष 2021 से 2025 के बीच कुल 11 कार्यों में पति-पत्नी के खातों में 22,962 रुपये का भुगतान दर्शाया गया है।
मस्टरोल और फाइलें गायब
जब इस मामले में शुक्रवार को ब्लॉक कार्यालय में मनरेगा सहायक यशवंत से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि, उनके किसी भी मस्टरोल पर हस्ताक्षर नहीं हैं, न ही ब्लॉक कार्यालय में इससे संबंधित फाइल और मस्टरोल उपलब्ध हैं। इससे मनरेगा प्रणाली की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विधायक ने आरोपों को बताया साजिश
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक दुर्गेश्वर लाल ने कहा कि, “बिचौलियों की दुकानें बंद हो गई हैं, इसलिए मुझे ट्रोल किया जा रहा है। जब तक मस्टरोल नहीं बनता और काम करने वाले के साइन नहीं होते, तब तक भुगतान नहीं हो सकता। यह मेरी छवि खराब करने की साजिश है। विधायक बनने से पहले मेरा जॉब कार्ड जरूर था।”
रिकवरी के निर्देश, जांच के आदेश
मामले को गंभीरता से लेते हुए खंड विकास अधिकारी शशि भूषण बिंजोला ने कहा कि, “मामला संज्ञान में आया है। शनिवार को आराकोट में जन सेवा शिविर के बाद संबंधित सभी कार्मिकों को तलब कर जानकारी ली जाएगी। जांच के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उससे मनरेगा के तहत जारी पूरी धनराशि की रिकवरी की जाएगी।”
प्रदेशभर में चर्चा
एक ओर जहां देश में मनरेगा योजना के नाम को लेकर राजनीतिक बहस जारी है, वहीं उत्तरकाशी में एक मौजूदा विधायक और उनकी पत्नी के खातों में मनरेगा मजदूरी का भुगतान होना इस योजना की निगरानी और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।



