उत्तराखंड में 9 नए डिप्टी कलेक्टरों की तैनाती। देखें लिस्ट
देहरादून। डॉ. आर. एस. टोलिया उत्तराखंड प्रशासन अकादमी, नैनीताल में 15 सितंबर 2025 से 6 दिसंबर 2025 तक व्यावसायिक प्रशिक्षण पूरा करने वाले राज्य सिविल सेवा के 9 प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों को आखिरकार उनकी पहली तैनाती मिल गई है।
शासन ने स्पष्ट निर्देशों के तहत सभी अधिकारियों को उनके गृह जनपदों से अलग जिलों में नियुक्त किया है, ताकि वे निष्पक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता के साथ कार्य कर सकें।
नए डिप्टी कलेक्टरों की पोस्टिंग सूची
- आशीष जोशी – डिप्टी कलेक्टर, पिथौरागढ़
- वैभव काण्डपाल – डिप्टी कलेक्टर, बागेश्वर
- पंकज भट्ट – डिप्टी कलेक्टर, चमोली
- अनिल सिंह रावत – डिप्टी कलेक्टर, रुद्रप्रयाग
- अल्केश नौडियाल – डिप्टी कलेक्टर, टिहरी गढ़वाल
- याक्षी अरोड़ा – डिप्टी कलेक्टर, अल्मोड़ा
- कृष्णा त्रिपाठी – डिप्टी कलेक्टर, पौड़ी गढ़वाल
- अंकित राज – डिप्टी कलेक्टर, टिहरी गढ़वाल
- सौम्या गर्थ्याल – डिप्टी कलेक्टर, अल्मोड़ा
प्रशिक्षण के बाद नई जिम्मेदारियाँ
तीन महीने से अधिक चले इस प्रशिक्षण में प्रशासनिक ढांचे, लोक सेवा प्रबंधन, फील्ड इंस्पेक्शन, आपदा प्रबंधन, वित्तीय प्रणाली, मानव संसाधन प्रबंधन, राजस्व कानूनों, ई-गवर्नेंस और जिला प्रशासन के विभिन्न आयामों पर गहन प्रशिक्षण शामिल था।
इनकी तैनाती के बाद अब यह युवा प्रशासनिक अधिकारी अपने-अपने जिलों में विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन और जन समस्याओं के समाधान सहित प्रमुख कार्यों में भूमिका निभाएंगे।
क्यों नहीं दी गई तैनाती गृह जनपद में?
शासन की ओर से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी अधिकारी को उनके गृह जिला या उससे लगे जिलों में तैनाती न दी जाए, ताकि हितों का टकराव न हो और प्रशासनिक निर्णयों में निष्पक्षता बनी रहे। यह नीति अखिल भारतीय सेवाओं की तर्ज पर राज्य सिविल सेवाओं के लिए भी लागू की जा रही है।
युवा अफसरों से बड़ी उम्मीदें
पहली तैनाती किसी भी अधिकारी के करियर का अहम पड़ाव होती है। इन सभी 9 युवा अफसरों से सरकार को उम्मीद है कि वे स्थानीय विकास, संवेदनशील प्रशासन, तकनीक का बेहतर उपयोग, पारदर्शिता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देंगे।
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