स्यानाचट्टी में फिर बनी खतरे की झील, यमुना का पानी पुल के ऊपर से बहा
उत्तरकाशी। पहाड़ों पर लगातार हो रही भारी बारिश ने यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव स्यानाचट्टी को फिर संकट में डाल दिया है। इलाके में झील बनने से हालात खतरनाक हो गए हैं।
रविवार को नदी का जलस्तर इतना बढ़ गया कि यमुनोत्री हाईवे पर बना मोटर ब्रिज पानी में डूब गया। तेज बहाव में पेड़ पुल पर फंस गए हैं, जिससे पानी अब पुल के ऊपर से गुजर रहा है और स्थानीय लोग दहशत में हैं।
स्थानीय निवासी शैलेंद्र सिंह राणा और नवदीप रावत ने बताया कि रातभर हुई मूसलाधार बारिश के कारण यमुना का बहाव बेकाबू हो गया। कई होटल और मकान आधे से ज्यादा पानी में डूब गए। यहां तक कि कालन्दी होटल की दूसरी मंजिल तक पानी पहुंच गया है और पार्किंग क्षेत्र भी खतरे में है।
प्रशासन सतर्क, DM मौके पर रवाना
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य हालात का जायजा लेने के लिए मौके पर रवाना हो गए हैं। वहीं, नदी के प्रवाह को सामान्य करने के लिए सिंचाई विभाग की तीन मशीनें लगातार काम कर रही हैं।
सहायक अभियंता राकेश बिजल्वाण ने बताया कि कुपड़ा गाड़ में लगातार मलबा आने से बार-बार झील बन रही है। विभाग की कोशिश है कि जल्द से जल्द झील को खाली कर दिया जाए, ताकि पुल और कस्बे पर खतरा कम हो।
झील बनने की पुरानी समस्या
स्यानाचट्टी में झील बनने की समस्या नई नहीं है। 28 जून को कुपड़ा गाड़ के उफान पर आने से पहली बार झील बनी थी। इसके बाद 21 अगस्त को हालात गंभीर हो गए, जब दोबारा भारी मलबा आने से नदी का प्रवाह रुक गया।
हालांकि एक दिन बाद पानी के उफान से झील खाली हो गई थी। लेकिन 24 अगस्त से जलस्तर लगातार घट-बढ़ रहा है, जिससे लोगों की धड़कनें तेज बनी हुई हैं।
आपदा प्रभावितों के लिए मदद पहुँची थराली
इसी बीच चमोली जिले के थराली क्षेत्र में आपदा प्रभावितों की मदद के लिए सामाजिक संगठन और नेता आगे आ रहे हैं। रामनगर की प्रयास सेवा संस्था ने 200 बैग राहत सामग्री भेजी है, जिनमें चावल, आटा, दाल, तेल, नमक, हल्दी, धनिया, मिर्च जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजें शामिल हैं।
पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत भी स्वयं राहत सामग्री लेकर थराली रवाना हुए। उन्होंने कहा – “आपदा प्रभावितों की मदद करना हर सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है। यह सिर्फ शुरुआत है, आगे भी हर जरूरत को पूरा किया जाएगा।”
स्यानाचट्टी की झील और थराली की आपदा, दोनों ही घटनाएं यह दिखाती हैं कि लगातार बारिश और पहाड़ी मलबे ने उत्तराखंड को एक बड़े संकट की ओर धकेल दिया है।